द्वादश ज्योतिर्लिंग

श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग — ज्योतिर्लिंग

  • उत्तर प्रदेश
  • स्थानविश्वनाथ गली, वाराणसी नगर, वाराणसी जिला, उत्तर प्रदेश
  • अधिष्ठाता देवताशिव

यात्री सूचना: मंदिर में मोबाइल फोन, कैमरा, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ एवं चमड़े का सामान ले जाना वर्जित है; सुगम दर्शन एवं आरती टिकट मंदिर न्यास के आधिकारिक माध्यम से ही लें।

शास्त्रोक्त एवं ऐतिहासिक महत्व

  • पौराणिक संदर्भ: शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता) एवं स्कंद पुराण के काशी खंड में काशी को शिव की प्रिय नगरी "अविमुक्त क्षेत्र" कहा गया है; मान्यता है कि प्रलय में भी शिव इस नगरी को त्रिशूल पर धारण कर सुरक्षित रखते हैं और यहाँ देह त्यागने वाले को शिव तारक मंत्र देते हैं।
  • आक्रमण एवं पुनर्निर्माण: 1194 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक की सेना ने मंदिर को ध्वस्त किया; बाद में पुनर्निर्मित मंदिर पुनः क्षतिग्रस्त हुआ। 1585 ई. में राजा टोडरमल के सहयोग से पं. नारायण भट्ट ने पुनर्निर्माण कराया, जिसे 1669 ई. में औरंगजेब के आदेश से ध्वस्त कर वहाँ ज्ञानवापी मस्जिद बनाई गई।
  • वर्तमान मंदिर: वर्तमान मंदिर का निर्माण 1780 ई. में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने कराया। 1835 ई. के आसपास पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने शिखर एवं गुंबदों पर स्वर्ण-पत्र चढ़ाने हेतु स्वर्ण दान किया।
  • काशी विश्वनाथ धाम: मंदिर को गंगा तट (ललिता घाट) से सीधे जोड़ने वाला "श्री काशी विश्वनाथ धाम" कॉरिडोर 13 दिसंबर 2021 को लोकार्पित हुआ।

प्रमुख विशेषताएँ, वास्तुकला, अनुष्ठान एवं आरती

  • शैली: नागर शैली का मंदिर, जिसके दो शिखर एवं गुंबद स्वर्ण-मंडित हैं, इसलिए इसे "स्वर्ण मंदिर" भी कहा जाता है।
  • गर्भगृह: चाँदी की वेदी पर लगभग दो फीट ऊँचा कृष्ण पाषाण का लिंग स्थापित है; परिसर में अविमुक्तेश्वर, दंडपाणि, विष्णु, विनायक, शनिश्वर आदि के छोटे मंदिर हैं।
  • ज्ञानवापी कूप: मंदिर और मस्जिद के बीच स्थित यह कूप परंपरा में अत्यंत पवित्र माना गया है।
  • आरतियाँ: प्रतिदिन पाँच आरतियाँ — मंगला आरती (लगभग प्रातः 3:00), भोग आरती (लगभग मध्याह्न 11:15), सप्तऋषि आरती (लगभग सायं 7:00; मान्यता है कि सप्तऋषियों की ओर से यह आरती होती है), श्रृंगार/भोग आरती (लगभग रात्रि 9:00) एवं शयन आरती (लगभग रात्रि 10:30)।

दर्शन का सही समय, समय-सारिणी एवं उत्सव

  • उपयुक्त ऋतु: अक्टूबर से मार्च; देव दीपावली (कार्तिक पूर्णिमा) पर घाटों की दीपमालिका दर्शनीय होती है।
  • दैनिक दर्शन: लगभग प्रातः 3:00 (मंगला आरती) से रात्रि 11:00 बजे तक, आरतियों के समय सामान्य दर्शन अस्थायी रूप से रुकते हैं (समय में परिवर्तन संभव; यात्रा से पूर्व मंदिर न्यास से पुष्टि करें)।
  • प्रमुख पर्व: महाशिवरात्रि, श्रावण मास (कांवड़ यात्री एवं सोमवार का विशेष श्रृंगार), रंगभरी एकादशी (फाल्गुन शुक्ल एकादशी पर गौना उत्सव), अन्नकूट तथा देव दीपावली।

कैसे पहुँचें

  • हवाई मार्ग: लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, बाबतपुर — लगभग 25 किमी।
  • रेल मार्ग: वाराणसी जंक्शन (कैंट) लगभग 5 किमी; बनारस स्टेशन (पूर्व मंडुवाडीह) लगभग 6 किमी; पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन लगभग 17 किमी।
  • सड़क मार्ग: प्रयागराज (लगभग 125 किमी), लखनऊ एवं पटना से राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा; गोदौलिया चौक से आगे पैदल या ई-रिक्शा द्वारा धाम के प्रवेश द्वार तक।

आसपास के आध्यात्मिक एवं दर्शनीय स्थान

  • दशाश्वमेध घाट: सायंकालीन गंगा आरती — लगभग 0.5 किमी।
  • अन्नपूर्णा मंदिर एवं विशालाक्षी मंदिर (शक्तिपीठ): मंदिर परिसर के समीप — लगभग 0.2–0.5 किमी।
  • मणिकर्णिका घाट: लगभग 0.5 किमी।
  • काल भैरव मंदिर: काशी के कोतवाल — लगभग 2 किमी।
  • संकट मोचन हनुमान मंदिर: गोस्वामी तुलसीदास से संबद्ध — लगभग 5 किमी।
  • सारनाथ: भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना का स्थल — लगभग 10 किमी।

चित्र

  • उत्तर प्रदेश के प्राचीन एवं सांस्कृतिक नगर वाराणसी में स्थित श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग—सनातन धर्म का सबसे प्रमुख आध्यात्मिक और मोक्ष केंद्र। स्वर्ण शिखर और भव्य काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के साथ
    उत्तर प्रदेश के प्राचीन एवं सांस्कृतिक नगर वाराणसी में स्थित श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग—सनातन धर्म का सबसे प्रमुख आध्यात्मिक और मोक्ष केंद्र। स्वर्ण शिखर और भव्य काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के साथ
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स्रोत 1

  • Major Temples, Tirthas & Dhams of India (Avyani project reference, EN + HI editions, Sep 2026)

जहाँ कोई परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों या संप्रदायों में अलग ढंग से कही जाती है, वहाँ सभी कथन साथ-साथ दिए गए हैं।

दर्शन समय, कपाट तिथियाँ, पंजीकरण नियम एवं दूरियाँ अनुमानित हैं और समय-समय पर बदलती हैं; यात्रा से पूर्व संबंधित मंदिर ट्रस्ट/प्रशासन की आधिकारिक सूचना से पुष्टि करें।

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