द्वादश ज्योतिर्लिंग

श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग — ज्योतिर्लिंग एवं शक्तिपीठ

  • आंध्र प्रदेश
  • सुगम
  • स्थानश्रीशैलम, नंद्याल जिला, आंध्र प्रदेश
  • अधिष्ठाता देवताशिव

यात्री सूचना: नल्लमला वन क्षेत्र (नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य) से गुजरने वाला मार्ग रात्रि में सामान्यतः बंद रहता है; यात्रा का समय इसी अनुसार रखें।

शास्त्रोक्त एवं ऐतिहासिक महत्व

  • पौराणिक संदर्भ: शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता) के अनुसार विवाह-प्रसंग से रुष्ट होकर कार्तिकेय क्रौंच पर्वत पर चले गए; उनसे मिलने शिव और पार्वती यहाँ मल्लिकार्जुन एवं भ्रमरांबा रूप में प्रतिष्ठित हुए। स्कंद पुराण में "श्रीशैल खंड" के अंतर्गत इस क्षेत्र का माहात्म्य वर्णित है।
  • ज्योतिर्लिंग एवं शक्तिपीठ: यह उन विरल स्थलों में है जहाँ ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ (माता भ्रमरांबा) एक ही परिसर में हैं; भ्रमरांबा को अष्टादश महाशक्तिपीठों में गिना जाता है।
  • ऐतिहासिक संरक्षण: सातवाहन काल से संदर्भ मिलते हैं; विजयनगर सम्राट हरिहर द्वितीय ने मुखमंडप बनवाया और कृष्णदेवराय (16वीं शताब्दी) ने गोपुर एवं मंडपों का निर्माण कराया। 1677 ई. में छत्रपति शिवाजी महाराज ने यहाँ दर्शन कर उत्तरी गोपुर का निर्माण कराया।
  • नल्लमला पर्वत श्रृंखला में कृष्णा नदी के तट पर स्थित यह क्षेत्र शैव एवं वीरशैव परंपरा का प्रमुख केंद्र है; परंपरा के अनुसार आदि शंकराचार्य ने यहीं शिवानंद लहरी की रचना की।

प्रमुख विशेषताएँ, वास्तुकला, अनुष्ठान एवं आरती

  • शैली: द्रविड़ शैली का मंदिर, जो ऊँची पाषाण प्राकार-भित्तियों (लगभग 600 फीट × 500 फीट) से घिरा है; इन भित्तियों पर रामायण-महाभारत एवं शैव कथाओं के उत्कीर्ण दृश्य हैं। चारों दिशाओं में गोपुर हैं।
  • गर्भगृह: स्वयंभू लिंग आकार में छोटा है; परंपरागत रूप से भक्तों को निर्धारित समय पर लिंग का स्पर्श-दर्शन (अभिषेक सहित) करने की अनुमति रही है, जो भीड़ के अनुसार नियंत्रित की जाती है।
  • भ्रमरांबा मंदिर: मुख्य मंदिर के पीछे ऊँचे स्थान पर स्थित; मान्यता है कि देवी ने भ्रमर (भौंरे) रूप में अरुणासुर का वध किया।
  • विशेष अनुष्ठान: रुद्राभिषेक, कुंकुमार्चना तथा महाशिवरात्रि ब्रह्मोत्सव के दौरान लिंगोद्भव काल की विशेष पूजा और रथोत्सव।

दर्शन का सही समय, समय-सारिणी एवं उत्सव

  • उपयुक्त ऋतु: अक्टूबर से फरवरी; वर्षा ऋतु में घाट मार्ग पर सावधानी आवश्यक है।
  • दैनिक दर्शन: लगभग प्रातः 4:30 से दोपहर 3:30 तथा सायं 6:00 से रात्रि 10:00 बजे तक; प्रातःकालीन सुप्रभात एवं महामंगल आरती लगभग 5:00 बजे (समय में परिवर्तन संभव; यात्रा से पूर्व मंदिर न्यास से पुष्टि करें)।
  • प्रमुख पर्व: महाशिवरात्रि ब्रह्मोत्सव (लगभग 11 दिन), उगादि उत्सव (जिसमें कर्नाटक-महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में पदयात्री आते हैं), कार्तिक मास के सोमवार एवं दशहरा (भ्रमरांबा नवरात्रि)।

कैसे पहुँचें

  • हवाई मार्ग: कुरनूल (ओरवकल) हवाई अड्डा लगभग 180 किमी; हैदराबाद (राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय) हवाई अड्डा लगभग 200 किमी।
  • रेल मार्ग: मरकापुर रोड स्टेशन लगभग 85 किमी (निकटतम); कुरनूल सिटी लगभग 180 किमी।
  • सड़क मार्ग: हैदराबाद (लगभग 215 किमी), कुरनूल एवं विजयवाड़ा से एपीएसआरटीसी व टीएसआरटीसी की बसें; अंतिम भाग नल्लमला वन्य क्षेत्र का घाट मार्ग है।

आसपास के आध्यात्मिक एवं दर्शनीय स्थान

  • पातालगंगा (कृष्णा नदी घाट): स्नान हेतु; रोपवे सुविधा — लगभग 1 किमी।
  • साक्षी गणपति मंदिर: मान्यता है कि यहाँ गणेश जी भक्तों की यात्रा के साक्षी हैं — लगभग 3 किमी।
  • हाटकेश्वरम: लगभग 5 किमी।
  • शिखरेश्वरम: श्रीशैल पर्वत का सर्वोच्च बिंदु — लगभग 8 किमी।
  • अक्क महादेवी गुफाएँ: वीरशैव संत-कवयित्री से संबद्ध; कृष्णा नदी में नौका से — लगभग 10 किमी।
  • श्रीशैलम बांध: लगभग 14 किमी।

चित्र

  • नल्लामाला की वादियों में गूँजता ॐ नमः शिवाय। द्वितीय ज्योतिर्लिंग श्री मल्लिकार्जुन महादेव के पावन दर्शन।
    नल्लामाला की वादियों में गूँजता ॐ नमः शिवाय। द्वितीय ज्योतिर्लिंग श्री मल्लिकार्जुन महादेव के पावन दर्शन।
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स्रोत 1

  • Major Temples, Tirthas & Dhams of India (Avyani project reference, EN + HI editions, Sep 2026)

जहाँ कोई परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों या संप्रदायों में अलग ढंग से कही जाती है, वहाँ सभी कथन साथ-साथ दिए गए हैं।

दर्शन समय, कपाट तिथियाँ, पंजीकरण नियम एवं दूरियाँ अनुमानित हैं और समय-समय पर बदलती हैं; यात्रा से पूर्व संबंधित मंदिर ट्रस्ट/प्रशासन की आधिकारिक सूचना से पुष्टि करें।

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